फिर से- ३




सोई सोई सी है फिज़ा,
हवाओं की नमी कुछ खो सी गयी है,
एक सूखे चश्म सा लगता है दिल,
जहां बहता था कभी एक सुन्दर झरना,
और थीं कुछ सुन्दर कलियाँ,
जो खिलने के लिए कर रही थी किसी का इंतज़ार,
वो कलियाँ अब मुरझा सी गयी हैं,
चलो किसी और के लिए फिर से अश्क बहाए जाएँ,
उन मुरझाई कलियों को फूल बनाया जाए 
चलो फिर से इश्क़ किया जाए|

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